इस लेख में 3 व्यक्तियो को इंगित किया जा रहा है तीनो के विषय में संक्षेप में बताया जायेगा
1.हामिद अंसारी-ये वो व्यक्ति है जो भारत के प्रधान नागरिक राष्ट्रपति का मुख्या सलाहकार है।ये वाही व्यक्ति है जो राष्ट्रपति की अनुपस्तिथि में उसका काम करने की हैसियत रखता है।धर्म से ये मुस्लिम है और काफी अच्छे से अपने धर्म के पालक है।इन्होंने कभी भी राष्ट्रीय ध्वज को सलामी नहीं दी यहाँ तक की गणतंत्र दिवस पर भी नहीं दी।इन्होंने एक समारोह में तिलक लगवाने से ये कहकर मना कर दिया की इनका धर्म इस कार्य की अनुमति नहीं देता।क्या ये रास्ट्रवादी है??
देश के इतने बड़े पद पर आसीन होकर भी देश को समर्पित ना होना केवल धर्म को समर्पित होना क्या ये सही है????
इस बात का जवाब केवल भक्त लोग ही दे सकते है।
मीडिया इसका जवाब नहीं मांगती क्योके ये देश सिर्फ हिन्दुओ से देश भक्ति का सबूत मांगता है।
कारगिल ने एक शहीद हुआ तो पूरी कौम को गोरवान्वित महसूस हुआ लेकिन ये नहीं देखा की और भी कितने लोग मरे थे???किस धर्म के थे किस जाती के थे एक ईसाई सिपाही ने अपने अफसर के शव को लाने के लिए जान दी उसके बारे में किसी ने नहीं कहा।
जय ललिता - मुख्यमंत्री थी और हैं।
आय से ज्यादा संपत्ति रखने के जुर्म में जेल जा चुकी है और बहार आके शपथ भी ले ली दोबारा मुख्यमंत्री की।अब बात ये है की शपथ लेने के समय पर राष्ट्रीयगान बज रहा था शुभ मुहूर्त निकल ना जाये इस लये उसे बंद कर के शपथ दिलाई गई।अब इसमें अपमान वाली क्या बात है बंद तो किया था ना अगर बिजली गुल हो जाती तो भी तो अपमान होता ना।उनका धर्म लाखो सालो से है और राष्ट्रीयगान को अभी 100 वर्ष नहीं हुए ठीक से धर्म का अपमान कर लो लेकिन राष्ट्रीयगान का नहीं होना चाहिए ये कहा का न्याय है??
हमने कर दिया तो अन्याय और आप करो तो धार्मीक।।।
3.अब्दुल् कलाम -मिसाइल मैन महान वैज्ञानिक और भारत के पूर्व राष्ट्रपति इन्होंने कभी ऐसा कोई काम नहीं किया की ये गलत साबित हो।
राष्ट्र को सर्वोपरि माना इस्लाम को दूसरे स्थान पर और भारतीयता को पहले पे रखा।
गीत का पाठ करना दिनचर्या में शामिल था।
मीट खाने से परहेज।
मीट खाना बुद्धि भ्रस्ट करने के सामान
ये थे सच्चे रास्ट्रवादी
ध्वज को प्रणाम करने से अगर इस्लाम भ्रस्ट होता है तो ये इस्लामी नहीं हो सकते अगर तिलक लगाने से इस्लाम खतरे में आता है तो ये इस्लामी नहीं हो सकते।
अब आप ही इन विषयो पे विचार करे और कुछ बताये।
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