बात उस इसमे की है जब में विद्यालय में पढ़ा करता था मेरा एक सहपाठी जो मुज़से बात किया करता था अपने मस्जिद के विषय में उसने एक दिन एक बड़ी ही अचंभित करने वाली बात मेरे आगे रखी और उसपे विशवास करने को कहा ।
संवाद कुछ इस प्रकार था
विद्यालय में भोजन अवकाश हुआ और उसने अपनी बात सामने रखी कहा की कल किसी बच्चे में कुरान जमीन पर गिरा दी तो मोलवी साहब ने पुछा की किसने गिराई कुरान भूमि पर काफी कोशिशो के बाद भी किसी ने इस बात को नहीं बताया की किसने गिराया।
तब मोलवी साहब ने एक परचा उठाया और कुछ बुदबुदाया उसके बाद उसे जल दिया और कहा की वो बच्चा मर गया है जिसने ऐसा किया।
अब प्रश्न ये है की क्या ऐसा संभव है की कागज के जलने से कोई व्यक्ति मर जाये??
कोनसा मजहब इस बात को कहता है की पुस्तक के जमीन पर गिरने की सजा अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी??
क्या मानवता कोई धर्म नहीं है?
गलती से गिरी एक पुस्तक से ईश्वर का अपमान हो गया?
बच्चे ईश्वर का रूप है तो क्यों इस प्रकार से उन्हें प्रताड़ित किया जाता है
आज के समय में मुजाहिद्दीन और ऐसे ही कई समूहों ने विश्व में शांति को भंग किया हुआ है केवल एक धर्म के नाम पर और केवल ये कहकर की येसब वो शांति स्थापित करने के लिए कर रहे है।
महाराजा अशोक ने भी अपनी तलवार रख दी थी शांति स्थापित करने के लिए वो भी विश्व विजेता थे।
उनके समक्ष कोई ऐसा राजा नहीं था जो उन्हें चुनोती दे सके फिर भी उन्होंने शांति पूर्ण तरीके से अपना राज चलाया अपनी बेटी को सत्ता सोंप कर संन्यास धारण किया और फिर कभी युद्ध नहीं किया तो क्यों आज के समय में कुछ मुस्लिम मिलकर ओरतो और बच्चों पर अत्याचार कर रहे है??
कमजोरो पर अत्याचार करना नपुंसकता है और ये केवल एक ही जाती दिखा रही है ।
Sunday, 24 May 2015
मुस्लिम भी अंधविश्वासी है केवल हिन्दू को दोष ना दें
Posted on 10:13 by Twiceofx
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